हलवा

 🙏 स्वदेशी के प्रचारक,महान वैज्ञानिक, महान क्रांतिकारी आदरणीय राजीव दीक्षित जी कहा करते थे कि ...

" सुब्ह काल नास्ते मे खाया जाय तो दुनिया का सबसे बड़ा शक्तिशाली एवं मनोदैहिक स्तर पर जोरदार ताकतवर नास्ता भारतीय मनभावन मिष्ठान्न यह सुमधुर,सुस्वादिष्ट, --> " हलवा " है !"


हमारे भारत के 29 राज्यों मे भौगोलिक परिस्थितिजन्य वातावरण एवं ऋतुचक्र अनुसार पहले से ही वैविध्यपूर्ण हलवा बनता आया है! 


अपने राज्य का मशहूर धरातलीय ट्रेडिशनल गाँव-देहात मे बनाया जाने वाला हलवा ही खाना चाहिए ..तो ही हलवा आरोग्यप्रद रहेगा ! फिर भले ही आप शहर या सोसाइटीज अपार्टमेंट या ओफिस मे उल्झे हुए हो तो भी अणिशुद्ध आयुर्वेद अनुसार ही हलवा तो देशी-गांवठी ही बनाकर खाना पड़ेगा !!


हलवे मे अपने राज्य मे होने वाले अन्न,धान्य,कठोर,मोटे अनाज वगैरह का ट्रेडिशनल आटा,स्वदेशी-गौवंश का अणिशुद्ध बिलोना धी,खडी मिश्री,ड्रायफृट,सोंठ वगैरह का कोम्बो होना अतिशय आवश्यक रहता है। 


ये गाँव-देहात के विविध हलवों के फोटोग्राफ देखकर आपके मुँह मे पानी आ जाने वाला ये हाल है तो जब हकीकत मे हलवा बनाकर खाओगे तो कितनी हलवा-भुख विकसित होगी .. ओर तब जाके हलवा बनाकर खाओगे तो .. अहा ! क्या अद्भुत आरोग्यप्रद आनंदप्रमोद सह स्ट्रेंथ शरीर बनेगा ..ये तथ्य-पथ्य-सत्य सोचा भी करो न जरा !? 


हलवा हालत मे सुधार लाता है जनाब! फिर तुम ये शहरी कुडा-कचरा वडापाउ,पाउभाजी,पानीपुरी,दाबेली-दाटेली वगैरह नारकीय नाचिजों को नास्ते मे खाने के लिए क्युं अडे हुए हो भईसाब  !? 


आयुर्वेद अनुसार देशी हलवा तन,मन,बुद्धि कि  हालत हेल्धि बनाने मे शतप्रतिशत सुधार लाता है जनाब  ! .. बकवास नूडल्स,कटलेस,पिज्जा,बफ बर्गर वगैरह मे घंटा भी पौष्टिकता नही है ये सिम्पल सच्चाई का कटुसत्य समझते क्युं नही हो तुम !? घुर्ततापुर्ण षडयंत्रों के तहत अनावश्यक एवं बिनजरुरी फास्टफूड,जंकफुड,कोल्ड्रिंक,सोफ्टड्रिंक नामक रोगकारी कुडा-कचरा खिलाना,पिलाना तो केवल हम सब को मूर्ख बनाकर देखादेखी स्वादलोलुपता कि ओर आकर्षित करके हेल्थमाफिया जरिए लाखों-करोडों कमाने का उग्रकर्मी आसुरी एवं राक्षसी चुतियापा मात्र ही है बस !! 


इसलिए आयुर्वेद अनुसार मनोदैहिक-बौद्धिक-आत्मिक स्तर पर  ... आरोग्यप्रद,बलप्रद तथा सुख-संतोषकारक  तुष्टि,पुष्टि,संतुष्टि प्रदायक हमारे भारतीय स्वदेशी-गौवंश के पंचगव्यामृतो,देशी धान्यों,शाक-सब्जीयों,देशी फलों-कन्दमुलों को भी औषधीय आहार मे स्थान देना ही चाहिए!


अंतत: अपने ही देश एवं राज्य के निजी स्वदेशी बीजों से उगाये हुए अन्न-धान्य-फल-फूल-शाक-साग-सब्जियों-कन्दमुलों से बने हुए अपने राज्य के धरातलीय खाध्य, पेय,आहार,विहार,व्यवहारों को भी खान-पान,रहन-सहन-आचरण मे प्राथमिक प्राधान्य देना ही बुद्धिमानी एवं आरोग्यप्रद चिरायु जीवनयापन कि दूरदर्शिता है ! 


Zink think:-> हलवा का जलवां ही हेल्धि हालत देगा .!

                      फास्ट तो लास्ट मे जिंदगी ब्लास्ट कर देगा.!


         

                      हलवा खाओ-खिलाओ खुद जान जाओ !

                      हलवा खाओ हालत मे बरकत लाओ !!!!!


अस्तु,तथास्तु,शुभमस्तु ।




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