सिफिलिस
सिफिलिस
– लाल फूल वाले कनेर की जड़ को पानी में घिसकर रोगग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है। इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोना भी लाभकारी होता है।
– सफेद कनेर की जड़ को पानी में पीसकर उपदंश पर लगाने से घाव, सूजन, जलन व दर्द ठीक होता है।
सफेद दाग
– 200 ग्राम कनेर के पत्ते को एक बाल्टी पानी में उबाल लें और इस उबले पानी से नहाएं। इससे कुष्ठ (कोढ़) के जख्म समाप्त होते हैं।
– सफेद या लाल फूल वाले कनेर की जड़ को पीसकर गाय के पेशाब में मिलाकर कुष्ठ (कोढ़) पर लगाने से आराम मिलता है।
– सफेद कनेर के 100 ग्राम पत्ते को 2 लीटर पानी में उबालें। जब यह उबलते-उबलते 1 लीटर बचा रह जाए तो इसे छानकर एक बाल्टी पानी में मिलाकर नहाएं। प्रतिदिन इस तरह पानी तैयार करके कुछ महीनों तक नहाने से कुष्ठ रोग ठीक होता है।
– कनेर की जड़ की छाल का रस निकालकर रोगग्रस्त स्थान पर लगाने से कोढ़ और अन्य त्वचा रोग समाप्त होते हैं।
– कनेर की जड़ की छाल को पानी के साथ घिसकर कुष्ठ (कोढ़) के दाग पर लगाने से दाग नष्ट होते हैं।
#सिफ़िलिस एक यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) है. यह बैक्टीरिया ट्रेपोनेमा पैलिडम के कारण होता है. यह संक्रमण असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होता है. सिफ़िलिस के कई चरण होते हैं और हर चरण में अलग-अलग लक्षण दिखते हैं. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर और जानलेवा हो सकता है.
सिफ़िलिस के लक्षण:
त्वचा पर घाव
चकत्ते
फ्लू जैसे लक्षण
हल्का बुखार
थकान
गले में खराश
ग्रंथियों में सूजन
सिरदर्द
मांसपेशियों में दर्द
सिफ़िलिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है. गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से सिफ़िलिस के लिए जांच करानी चाहिए.


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