साड़ी: प्राचीन उत्तरीय, नवीन इतिहास

 🇮🇳 साड़ी: प्राचीन उत्तरीय, नवीन इतिहास 


🙏 साड़ी व धोती दोनों वस्त्रों की सबसे सरल संरचना हैं। इसलिए ये वस्त्रों के सबसे प्रारंभिक रूप माने जा सकते हैं। यह बिना सिले पहने जाने वाला परिधान है, परंतु हर किसी ऐसे अनसिले सरल वस्त्र को साड़ी नहीं कहा जा सकता। उसके लिए उनका एक अनुपात तक लंबा होना और एक विशेष शैली में पहना जाना जरूरी है।


साड़ी परिधानों में संभवतः सबसे लंबाई लिए परिधान है। न्यूनतम पाँच गज की तो होगी ही, नौ गज तक की साड़ी प्रचलित रही है। कुछ साफे व पगड़ियाँ लंबाई में चुनौती दे सकती हैं, परंतु वे सिमट कर गोल हो रह जाते हैं।


साड़ी व धोती दोनों एक से हैं और दोनों में भेद केवल स्त्री-पुरुष परिधान का था। स्त्र्युचित होने से साड़ी क्रमशः बहुरंगी होती गई, पुरुषोचित होने से धोती क्रमशः धवलतर होती गई। 

धोती शब्द का अर्थ ही है; धौति, धुल कर धवल हुई। साड़ी के लिए संस्कृत में शाटी या शाटिका शब्द का प्रयोग है। बौद्ध काल में पाली में साट्टिका शब्द का प्रयोग है। दूसरी शती की प्राप्त बौद्ध प्रतिमाओं में भी इसका निदर्शन है। जैन ग्रंथों में भी इसका भी इसका उल्लेख है। फिर भी संस्कृत की दृष्टि से यह अपेक्षाकृत नया शब्द है।


वैदिक काल में वास व अधिवास का वर्णन है। इनमें एक ऊपरी वस्त्र है, दूसरा अधोवस्त्र। इन्हें कुछ जन उत्तरीय व अंतरीय भी कहते हैं। 

उत्तर वैदिक काल में वास, अधिवास के अतिरिक्त नीवी अर्थात अन्त:वस्त्र होते थे। पेसस सामान्यत: नर्तकियाँ पहनती थीं। एक रेशमी अन्त:वस्त्र ‘तर्प्य’ का भी प्रयोग होता था। सर्दियों में ऊनी वस्त्रों के कपडे़, सिर पर पगड़ी पहनी जाती थी।


साड़ी का सांस्कृतिक उल्लेख व महत्व परिधानों में सर्वाधिक है। समस्त देवियों का कैलेंडर आर्ट में चित्रण साड़ी में ही होता है। यद्यपि यह छवि आधुनिक काल की देन है, परंतु इसमें पारंपरिक वसन का ही विस्तार है। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से ही मूर्तियों में उकेरी गई महिलाओं की आकृतियों में स्त्रियों के कमर के ऊपर वाले सामने के हिस्से को एवं पैरों के हिस्से को साड़ी के जरिए ढका हुआ दिखाया गया है।


कई पारंपरिक उल्लेख मिल जाते हैं...


- रामायण काल में महर्षि अत्रि की पत्नी अनसूया द्वारा सीता को साड़ी के रूप में दिव्य वस्त्र दिये जाने का उल्लेख है, जो कभी मलिन नहीं होती थी।


- महाभारत काल में द्रौपदी का चीरहरण प्रसिद्ध ही है, 




Comments

Popular posts from this blog

DAP

शरीर के चक्रों पर कौन से देवी-देवताओं का वास होता है?

जाग्रति यात्रा