अस्थि संहार (हड़जोड़)

 अस्थि संहार (हड़जोड़) हड्डी जोड़ने वाला पौधा  *आयुर्वेदिक लेप*


हिंदी में इसको हर जोरा कहा जाता है गुजराती में बेदारी कहते हैं  इसकी डालिया  चौकोर होती है और शाखाएं भी चौकोर होती इसके फूल कुछ-कुछ गुलाबी रंग के होते हैं और कुछ पीच कलर लिए हुए  होते हैं सबसे बड़ी 


बात यह है कि इसकी डाल पर लाल रंग के मटर के आकार के फल लगते हैं इसके फलों को एकत्र करके नींबू के रस में घोटा जाए और घोटते-घोटते लगभग 4 घंटे हो जाएं 


तो उसे गाढ़ा लेप  बन जाएगा और यह गाढा  लेप आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि  है अगर किसी व्यक्ति के शरीर में चाकू से या किसी अन्य चीज से 


चमडी या मांस कट जाए तो उस कटे  हुए स्थान पर अच्छी तरह से पौछकर  कर उस पर उपरोक्त प्रकार से बनाया हुआ लेप लगाकर पट्टी बांधने से 24 घंटो के भीतर भीतर यह घाव पूरी तरह से भर जाता है और पट्टी 


खोल कर हटा देने पर उस घाव का निशान भी शरीर पर नहीं रहता दूसरा प्रयोग यदि गिरने से या मारपीट से शरीर में अत्यधिक चोट पहुंची हो और यदि कोई हड्डी टूट गई हो तो उस टूटे हुए स्थान पर इसके बीजों को 


पौछकर  कर लगा दिया जाए तो 12 घंटों के भीतर भीतर वह हड्डी पूरी तरह से जुड़ जाती है और किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती |


अन्य बीमारियों में लाभ 


इसके अलावा शरीर किसी भी प्रकार से घायल हो गया हो  या हड्डियों में सूजन आ गई हो या किसी प्रकार गिरने से कोई चोट  या फैक्चर हो गया हो इन सभी स्थितियों में इन बीजों को पानी में घोटकर  प्रत्येक आधे 


घंटे के बाद 50 ग्राम पानी पिलाने से शरीर के सारे रोग समाप्त होकर दर्द पूरी तरह से दूर हो जाता है यह पानी 5  या 6  बार पिलाना चाहिए इसके फूल कामोत्तेजना देने वाले और कृमिनाशक होते हैं इसके अलावा 


यह तिल्ली के रोगों और जलोदर आदि के रोगों को मिटाने में भी पूर्ण सहायक है इसके माध्यम से खूनी बवासीर और पेट से संबंधित कोई भी  


दर्द को पूरी तरह से मिटाने में पूर्ण सक्षम है इतना ही नहीं इसके माध्यम से महिलाओं में अनियमित मासिक स्राव को भी दूर करने में यह औषधि 


पूर्ण फायदेमंद है दमे की बीमारी में भी इसका प्रयोग रामबाण सिद्ध होता है यदि किसी की रीढ़ की हड्डी में किसी भी प्रकार दर्द या पीड़ा हो, ऐसी स्थिति में इस पौधे की कोमल शाखाओं 


का बिछोना बनाकर गददे की तरह मोटा कर लें और उसके बाद उस पर लेट जाएं इससे रीड की  हड्डी का दर्द पूरी तरह समाप्त हो जाता है है डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में इसका प्रयोग करने से बहुत लाभ मिलता है 


इसके द्वारा लकवा,गठिया आदि रोगों को भी दूर करने में पूर्ण सहायता मिलती है इसको 64 दिव्य जड़ी बूटियों में स्थान प्राप्त है,सबसे बड़ी बात यह है तीन औषधियों का कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है 


वास्तव में प्रकृति की ओर से मनुष्य के लिए यह जड़ी वरदान स्वरुप  जैसी है!!!!!!!!!!!!



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