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DAP

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 DAP अर्थात डाय-अमोनियम फॉस्फेट आज कृषि और बागवानी में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली रासायनिक उर्वरकों में से एक है। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि लोग बिना पर्याप्त जानकारी के इसका उपयोग करने लगे हैं। इस प्रवृत्ति का परिणाम यह हुआ कि कई बार पौधों की जड़ें जल जाती हैं, मिट्टी की उर्वरता खत्म हो रही है और पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगा है।इसलिए अब समय आ गया है कि हम DAP जैसे उर्वरकों के प्रति आँख मूंदकर विश्वास करने के बजाय ज्ञान और उचित मार्गदर्शन में संतुलन और जागरूकता को प्राथमिकता दें। यह लेख DAP के सही उपयोग, संभावित दुष्प्रभावों और सुरक्षा उपायों की संपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए है। 🧪 DAP क्या है? DAP एक जल में घुलनशील रासायनिक उर्वरक है जिसमें मुख्यतः दो प्रमुख पोषक तत्व होते हैं: • नाइट्रोजन (18%) • फॉस्फोरस (46%) जैसे ही DAP मिट्टी में मिलता है, यह तुरंत रासायन छोड़ने लगता है। ➡️ रासायनिक सूत्र: (NH₄)₂HPO₄ 🌼 DAP के फायदे: • बीज अंकुरण में सहायक: जड़ों का विकास तेज़ होता है। • फूल और फल की संख्या बढ़ाता है: फॉस्फोरस की अधिकता के कारण। • प...

जाग्रति यात्रा

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 भारत में एक ऐसी अनोखी ट्रेन है जो साल में केवल एक बार 15 दिनों के लिए चलती है, लेकिन जब यह चलती है, तो सैकड़ों युवाओं के जीवन की दिशा बदल देती है और भारत के भविष्य को आकार देती है।  यह है ‘जाग्रति यात्रा’, जिसे मुंबई स्थित जाग्रति सेवा संस्थान नामक एनजीओ  2008 से हर साल संचालित कर रहा है। अब तक इस ट्रेन यात्रा में 23 देशों के 75,000 से अधिक युवा भाग ले चुके हैं। इस ट्रेन में हर साल करीब 500 युवा उद्यमी और सामाजिक परिवर्तन लाने के इच्छुक प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं। यात्रा का मुख्य उद्देश्य है – युवाओं को एक-दूसरे से जोड़ना, उन्हें भारत की जमीनी सच्चाइयों से परिचित कराना, और उन्हें नेतृत्व व उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करना। 2025 में यह यात्रा 7 नवंबर से शुरू होकर 22 नवंबर को समाप्त होगी।  मुंबई से शुरू होने वाली यह ट्रेन हुबली, बेंगलुरु, मदुरै, श्री सिटी, विशाखापत्तनम, ब्रह्मपुर, नालंदा, देवरिया, दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों से गुजरती है।  यात्रा के दौरान ट्रेन एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बन जाती है, जिसमें 100 से अधिक मार्गदर्शक, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य...

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है

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 #नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है !!  एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के बराबर होने लगी। जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख  नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है.. हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है। गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है। नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है। 1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय... सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारि...

खाना खाने का सही नियम 12 महीनों अनुसार

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 खाना खाने का सही नियम 12 महीनों अनुसार👇👇👇 चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है। वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है। ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है। अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला आदि का उपयो...

रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम जानिए।

 🇮🇳 रसोई में भोजन बनाना          छोड़ने का दुष्परिणाम जानिए।        अमेरिका में क्या हुआ, जब    घर में भोजन बनाना बंद हो गया ?             1980 दशक के        अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने    अमेरिकी लोगों को चेतावनी दी, कि     यदि वे परिवार में आर्डर देकर      बाहर से भोजन मंगवायेंगे, तो          परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे              समाप्त हो जाएगी. ★       साथ ही दूसरी चेतावनी दी, कि     यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण        घर के बुजुर्गों के स्थान पर     बाहर से व्यवस्था की तो यह भी   परिवार व्यवस्था के लिए घातक होगा.        लेकिन बहुत कम लोगों ने            उनकी सलाह मानी.           घर में भोजन बनाना        लगभग...

कौन कहता है कि भारत की खोज वास्को डी गामा ने की ,क्यों पढ़ाया जाता है फर्जी इतिहास।

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 🇮🇳 कौन कहता है कि भारत की खोज वास्को डी गामा ने की ,क्यों पढ़ाया जाता है फर्जी इतिहास।★★★ √●भारतवर्ष को अंग्रेजों ने नहीं खोजा था, यह सनातन है और इसके साक्ष्य भी हैं √●इतिहास हमेशा विजित द्वारा लिखा जाता है और वह इतिहास नहीं विजित की गाथा होती है। भारत के साथ भी यही हुआ है पहले इस्लामिक आक्रमण और 800 वर्षों शासन और फिर अंग्रेज़ो के 200 वर्ष तक के शासन ने इस देश के इतिहास लेखन को इस तरह से प्रभावित किया कि आज भी लोगों को यही लगता है कि India को ब्रिटिश ने बनाया। लोगों के मन में यह हिन भावना बैठी हुई है कि ब्रिटिश के आने से पहले भारत या India था ही नहीं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता और अपने आप को ‘History_Buff’ कहने वाले सैफ अली खान ने ये कह दिया कि मुझे नहीं लगता है India जैसा कोई कान्सैप्ट ब्रिटिश के आने से पहले था के नहीं। यह कोई हैरानी की बात नहीं है। पिछले 70 वर्षों में जिस तरह से इतिहास को उसी इस्लामिक और ब्रिटिश को केंद्र में रख कर पढ़ाया गया है ये उसी का परिणाम है। ब्रिटिश काल के इतिहासकारों ने अपने हिसाब से ही इतिहास लिखा जैसा एक विजित लिखता है यानि अपने ही गुणगा...

बाघ_नख

 #बाघ_नख #Tigers_Clow     Common name :- Tigers clow        Botanical name :- Myrtynia Annua L.            Family :- Martyniaceae        बाघ नख एक जड़ी-बूटी युक्त स्तम्भ, शाखित, ग्रंथिया बालो वाली वार्षिक जड़ी-बूटी पौधा हैं !जो 0.9-1.9 मीटर की ऊचाई तक बढ़ती हैं, यह बंजर भूमि, कूड़े के ढेर और सड़क के किनारे पर पायी जाती हैं !          पत्तियाँ विपरीत होती हैं और लाल रंग के पंखुड़ीया  होती हैं, वे चिपचिपे रूबर से मिलते जुलते हैं, इसके फूल हल्के गुलाबी और ट्यूबलर होते हैं और इनमे अमृत गाइड़ और बैगनी रंग के धब्बे होते हैं, पके होने पर फल काले पड़ जाते हैं और टिप पर कांटे लग जाते जिसके कारण इसको बिल्ली का पंजा या बाघ का पंजा के नाम से जाना जाता हैं ! बाघ नख  को व्यापक रूप से उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय विश्व क्षेत्रों में, विशेष रूप से मध्य अमेरिका और भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से प्राकृतिक रूप से वर्गीकृत किया गया है । यह आमतौर पर बीहड़ क्षेत्रों में पाया जाता है !  ...